शहादत…

वीर जवानों की कुर्बानी, 
देखो व्यर्थ न जाने पाये
इस धरती में उस मुल्क का,
कतरा भी न आने पाये


गलवान घाटी पर एक माँ ने,
एकलौता बेटा खोया
एक बाप छुपाकर अपना चेहरा,
सिसक सिसक रोया


पति के जाने की ख़बर से,
बीबी का कलेजा टूट गया
एक नवजात बेटी के सर से,
पिता का साया छूट गया


यह युद्ध नही था जिसको,
हम भारतवासी जायज़ मानें
छल से वार किया था फिर भी,
दुगनो की ले ली थी जानें


हमारे विश्वास को हर मंजर में,
अब तक था वो कुचल रहा
देश का सैनिक हर शहीद का,
अब बदला लेने मचल रहा


उस मुल्क की इस धरती से,
दिखावेकीदोस्ती अब थम जाएं
जिस भाषा मे वह समझे,
अब उसको उसमे समझाए


आँखे दिखाकर उसको अब,
सीधे सीधे ही समझाओ
अब ये पुराना भारत नही,
जिसको तुम डरा पाओ

#मन घुमक्कड़

तन्हा दोस्त…..

कह दे जो भी है शिकायत
पर तू रूठ न मुझसे जाना यार

जीवन मे तनाव है बहुत
क़ामयाबी के घाव है बहुत
तुझसे उलझन मैं साँझा करूँ
तू खुश होने का बहाना यार

इतनी तन्हा सी लगती है
तेरे बिन ये जिंदगी
इन काले दिलों की महफ़िल में
मैं ख़ुद ही हुआ बेगाना यार

मिलकर सब दोस्त साथ में
करे कुछ नया हाथ लेकर हाथ में
एक के दर्द में सब हो शामिल
वह होगा क्या जमाना यार

मेरा कोई संदेश न मिले तुझे
तू समझ तेरी जरूरत है तब मुझे
मुझे न समझ स्वार्थी
तू फ़ौरन मेरे पास आना यार

ग़र सांसे ये थमने लगे
रक्त भी मेरा जमने लगे
गले लगा दिल की गर्मी से
तू आकर मुझे बचाना यार

कह दे जो भी है शिकायत
पर तू रूठ न मुझसे जाना यार….

#मन घुमक्कड़

यारों का साथ….

बचपन के स्कूल वो प्यारे
वो मैदानों में दौड़ लगाना
इतने प्रफुल्लित रहते थे तब
जो साथ में थे वो यार ही थे

जब हल्की हल्की मूछे आयी
आवाज़ हमारी थी भर्राई
तब भी बातें सांझा करने
जो साथ में थे वो यार ही थे

एक उम्र जब दिल की धड़कन
देख किसी को सरपट दौड़े
उस वक्त हमे सलाह देने
जो साथ में थे वो यार ही थे

पास हुए स्कूल छूट गया
फिर कॉलेजों के दौर हुए
नई पढ़ाई नई जगह में
जो साथ में थे वो यार ही थे

होस्टल की वो मस्ती जब सब
रात में हुड़दंग करते थे
होली शू पॉलिस टूथपेस्ट से खेलने
जो साथ में थे वो यार ही थे

कुछ बेअकलों की बातों में
हम उनसे जब दो चार हुए
तब उनको सबक सिखाने को
जो साथ में थे वो यार ही थे

मेहनत से जी जान लगाकर
जब हम सब डिग्री पाए
इस खुशी में रंग जमाने
जो साथ में थे वो यार ही थे

नौकरी की अभिलाषा ने हमको
दर दर खूब भटकाया
तब मंदिरों में दुआ मांगने
जो साथ में थे वो यार ही थे

चयनित हुए नौकरी लगी
फिर नया वक्त सबका आया
इस खुशी को दिल से जीने
जो साथ में थे वो यार ही थे

जीवन मे हमसफर मिला गया
गठबंधन में था यार जब बँधा
शादी में पूरी रात नाचने
जो साथ में थे वो यार ही थे

जीवन के हर सुख दुःख में
हाथ कंधे पर रखकर
चेहरे पर मुस्कान लिए
जो साथ में थे वो यार ही थे

मुश्किल घड़ी में जब यारों का
कोई संदेशा मिल जाता
तब उसके पास पहुँचने
जो साथ में थे वो यार ही थे

सब जीवन मे मसगूल हुए
अब मिलना मुश्किल हो चुका
फ़ोन पे भी कहने सुनने
जो साथ में थे वो यार ही थे

माना जीवन की राहों में
अब मिलना मुश्किल हो चला
एक कोशिश करके फिर कहतें है
ये जो साथ में हैं वो यार ही हैं

#मन घुमक्कड़

पुरानी किताब…

पुरानी किताबें क्या गिरी शीशें की अलमारी से
चंद बिखरी तस्वीरों ने हमको जवां फिर कर दिया…

#मन घुमक्कड़

मैं नही आऊंगा…

मैं तेरे दर पे नही आऊंगा
रोज़ तेरे सामने बैठकर ही चला जाऊंगा
मैं तेरे दर पर नही आऊंगा..

न सर पर छत है न दीवार है कोई
ये कैसा जीवन दिया तुमने

न खाने का ठिकाना न कपड़े है बदन पे
आख़िर क्यों ऐसे हालातों में पैदा किया तुमने

इससे अच्छा तो मैं पहले ही मर जाता
जिंदा रहकर भी जिंदा कहाँ किया तुमने

हर बच्चें का अपना परिवार है यहाँ
मुझे इतनी भीड़ में अकेला क्यूं किया तुमने

शिकायत ही तो कर सकता हूं तुझसे मौला
कोई रहमगर भी तो नही दिया तुमने

लावारिस हूं सड़क में ही एक दिन मर जाऊंगा
पर मेरे मालिक, मैं तेरे दर पे नही आऊंगा..

मैं तेरे दर पे नही आऊंगा..

मैं तेरे दर पे नही आऊंगा..

#मन घुमक्कड़