ज़माने बदल गए….

यारों से जब मिलना , मुकर्रर हुआ

बरसों बाद देख के , हैरत में पड़ गए

थी आवाजों में तब्दीली , चेहरे बदले हुए

सोचे तो थे मिलके , तुरंत लौट आएंगे

मिलकर के सब यारों से , इरादे बदल गए


मुझको देख कर यार कुछ , शर्मिंदा से हुए

आंखे भीगा के बोले के , फिर जिंदा हम हुए

वह सोचे कि पहले जैसे , वो नही रहे

हम सोचे कि ऐ यार , कहीं हम तो न बदल गए


मैं आज भी वही हूं , और तुम भी वही हो

न हमने ग़ुरूर रखा , न तुमको गुमा हुआ

ज़िम्मेदारियों में हम , मशरूफ़ यूँ हुए

कि समुंदर से जीवन के , किनारे बदल गए


आज देखा दूर से , उस विद्यालय को जब

टूटी हुई छत के नीचे दिखे , बच्चे पढ़ते हुए

ग़र कमाया ज़िन्दगी में तो , इतना तो कर सकें

जहाँ बैठ पाई विद्या , हम उसको ढक सकें

इस ज्ञान से ही हमारे हैं , सितारे बदल गए


जिसने बनाया क़ाबिल , उसे देख आऊँ मैं

उन फ़रिश्ते के चरणों , को छू तो पाऊँ मैं

कुछ तो बीमारी में न , पहचान सके हमें

और कुछ गले लगा के , क़िस्मत बदल गए


जा रहे थे इबादत पे , गाड़ी मोड़ आये हम

इबादत वहीं अपनी , जहाँ हो यारों का ज़म

फिर नदी के किनारे , कुछ पल हम बिताएं

दिल आज भी करे कि , संग उनके दौड़ जाएं

पर क्या करें कुछ यार तो जवां हैं, कुछ के घुटने बदल गए

#मन घुमक्कड़

कैसे ?…….

जख़्म जो हमको मिले उनको दिखाऊँ कैसे
जो खुद दर पे दवा मांग रहे उनके दर जाऊँ कैसे

#मन घुमक्कड़

नक़ाब…

जाने कितने ही चेहरे हैं सियासत में एक चेहरे के पीछे
और नसीहतें यह की नक़ाबो में पहचान नही होती……

#मन घुमक्कड़

महफ़िल…

महफ़िल में थे कई लोग मग़र दिल में नही थे
जो दिल में थे वही हमारी महफ़िल में नही थे

#मन घुमक्कड़

मोहब्बत का तराना….

महफ़िल में मोहब्बत का तराना गुनगुनाया
फिर एक चेहरे में चेहरा पुराना याद आया

जो कभी मुक़म्मल न हो सकी उस कहानी सी
रोज सुनकर न रही यादे भी पुरानी सी
हर शाम दिन के ढलते पंजों की थपकियों के साथ
हमे फिर उसका वो गुनगुनाना याद आया

रोज अपने दिल को हम है समझाते
तेरी बेवफ़ाई के बहाने उसको बतलाते
पर तुम बेवफ़ा नही हो यह जानते थे हम
फिर तेरा वादा करके न आना याद आया

न कोई ख़्वाहिश में हम बेकरार हुए
जब भी मिले रिश्तों में फासला सा रखा
जहाँ भी रहो आबाद रहो इल्तिज़ा यही रब से
जब कभी दुआ में मुझे तू याद आया

अबके नज़र भी आये तो नज़रांदाज करना
अब हमको भी नज़रों में बैठा रखता है कोई
इस से पहले की भटक जाते ईमान से हम भी
हमें भी अपना बार-ए-ख़ुदाया याद आया

मेरे लिए अपना सब छोड़ बैठा कोई
थे उसके भी अरमान फिर भी ख़ुदको है समेटा कोई
नज़र हटा जब करने लगे उस हमसफ़र को याद
तब उस शक़्स में ही हमे ख़ुदाया याद आया

फिर महफ़िल में मोहब्बत का तराना गुनगुनाया
फिर एक चेहरे में चेहरा पुराना याद आया…..

#मन घुमक्कड़