अस्मत…..


दरिंदे अस्मत तार करें
सियासत बैठ विचार करें


मन को कुचल शरीर पे टूटे
एक गुड़िया के सारे सपने छूटे
जीवन से वह हार गई
लड़ते लड़ते स्वर्ग सिधार गयी
चाहे बेटी रोज मरे
पर सियासत बैठ विचार करें…


दरिंदे अस्मत तार करें
सियासत बैठ विचार करें


शर्म भी अब तो शर्माए
महिलाएं बेपरवाह कब जी पाए
हर काठ पे उल्लू बैठे है
कैसे खुद को बचा पाए
अब खुद ही दुर्गा बन इन
दुर्जनों का संहार करें
क्योकि सियासत बैठ विचार करें


दरिंदे अस्मत तार करें
सियासत बैठ विचार करें


सारी उम्र लड़कियों को ही समझाते
लड़कों को क्यों नहीं देते ज्ञान..
कि पौरुष तेरा नारी की रक्षा में है
न भक्षक तू बन जाना
अगर पिया है दूध माँ का,
तो नारी को कभी न लजाना
हर माँ, अब बच्चे के कानों में
बचपन से यह बात भरे..
क्योकि सियासत तो बैठ विचार करें


दरिंदे अस्मत तार करें
सियासत बैठ विचार करें

एक कसक, एक दहशत,
में जी रही ये बेटियां,
घर मे है पाबंदी,
बाहर ताने सहती बेटियां
दरिंदो की टोली से,
अस्मत बचाने लड़ती बेटियां
है कठिन जीवन फिर भी
आगे बढ़ती बेटियां
न्याय करो बस न्याय करो
हर बेटी यही फ़रियाद करें
यू दरिंदे न अस्मत तार करें
पर सियासत बैठ विचार करें


दरिंदे अस्मत तार करें
सियासत बैठ विचार करें

#मन घुमक्कड़

13 Replies to “अस्मत…..”

  1. दरिंदे अस्मत तार करें…मन को छूती है ये रचना । वर्तमान व्यवस्था डगमगाती सी।

    1. Violence against women and girls has increased, but till now strict laws have not been enacted in our country. It is sad to hear such incidents.😔
      Which direction are we going?
      Thank you so much for always encouraging,ma’am 🙏🙏🌻🎆

      1. True, crime increases due to political patronage. Whereas in other countries the law is above politics. There should be no political interference in the law.

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