नारी…

धरती का वरदान है नारी
मानव जीवन की शान है नारी
विभिन्न रूपों में मिलती जग को
एक ऐसा सम्मान है नारी

बहुत सहनशीलता इनके अंदर
मन जैसे हो समन्दर
मानव जीवन को चमकाने
देवत्व गुणों की खान है नारी

परिवार, देश, बच्चों की ख़ातिर
आ जाये कोई मुश्किल तो
रहकर अडिग राहों में
खुद का करती बलिदान है नारी

तेरे जन्म पर कोई रूठे
और कोई खुशी मनाये
दुःख सहकर, खुश रखती सबको
ऐसा अद्‌भुत त्याग है नारी

बाबुल की बगिया महकाके
अलग बाग का फूल बन जाती
मात पिता की ख़ातिर अपना 
करती सर्वत्र न्यौछावर नारी

क़ाबिल बनकर फ़र्ज निभाती
कर्त्तव्य पथ पर बढ़ते जाती
चाहे जो हो विपदा देश मे 
करती सदा योगदान है नारी

कभी बेटी, कभी प्यारी माता 
बहन बन, भाई से नाता 
पत्नी बन, सही बात बताती
घर सवार लक्ष्मी कहलाती
हर सुख में वह, हर दुःख में वह
हर रूपों में, जीवन महकाने
फूलों सी, मुस्कान है नारी

घर, बाहर, कुछ डरी हुई सी
ज़िंदा है, पर मरी हुई सी
वक़्त नया हो या हो पुराना
अक़्सर क्यूँ है, छलि हुई सी

नारी का अपमान करे वो
आबरू को नीलाम करे वो
अपनी शक्ति उन्हें दिखाकर
पौरुष का गुणगान करे वो

गर रक्त में तेरे संचार नही
नारी रक्षा का विचार नही
पहन चूड़ियां बैठ जा घर में
तुझे मर्द होने का अधिकार नही

सिर्फ चाहती साथ तुम्हारा
दे दो ग़र तुम उन्हें सहारा
सारा जीवन मेहका देंगी
तुम पे लुटा स्नेह वो सारा

दुर्गा की शक्ति भी इनमें
मीरा की भक्ति भी इनमें
संस्कृति की पहचान नारी से
देश का सम्मान नारी से

#मन घुमक्कड़