तन्हा दोस्त…..

कह दे जो भी है शिकायत
पर तू रूठ न मुझसे जाना यार

जीवन मे तनाव है बहुत
क़ामयाबी के घाव है बहुत
तुझसे उलझन मैं साँझा करूँ
तू खुश होने का बहाना यार

इतनी तन्हा सी लगती है
तेरे बिन ये जिंदगी
इन काले दिलों की महफ़िल में
मैं ख़ुद ही हुआ बेगाना यार

मिलकर सब दोस्त साथ में
करे कुछ नया हाथ लेकर हाथ में
एक के दर्द में सब हो शामिल
वह होगा क्या जमाना यार

मेरा कोई संदेश न मिले तुझे
तू समझ तेरी जरूरत है तब मुझे
मुझे न समझ स्वार्थी
तू फ़ौरन मेरे पास आना यार

ग़र सांसे ये थमने लगे
रक्त भी मेरा जमने लगे
गले लगा दिल की गर्मी से
तू आकर मुझे बचाना यार

कह दे जो भी है शिकायत
पर तू रूठ न मुझसे जाना यार….

#मन घुमक्कड़

12 Replies to “तन्हा दोस्त…..”

  1. प्रेम से ओतप्रोत।👌👌
    कह दे जो भी है शिकायत
    पर तू रूठ न मुझसे जाना यार।

    1. Of course, I think all those friends who have distanced themselves from their friends for some reason. They should meet again and eradicate the grievances between them. Thank you very much for your valuable words ma’am🙏

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