ख़्वाब….

ख़्वाब के बाद सुबह, ख़ुशगवार सी हो जाती है

उन ख्वाबों में वो जब, हमसे मिलने आती है।

ख्वाबों की मुस्कान लिए हम, नींद से जागा करते है

मुस्कान भुलाकर रोज़मर्रा की, दौड़ में भागा करते है।

रोटी इक़्तिज़ा हमको फिर, अऱ्ज पर ले जाती है

फिर इन तसव्वुर को हमसे, दूर कही छोड़ आती है।

क़ाबिल…

ख़्वाब देखकर तुम दुनिया में, न कभी सफलता पाओगे।
उन ख्वाबो को जीना होगा, अपनी मेहनत से संजोना होगा।
तब जाकर तुम इस दुनिया मे, रुतबा, रुपया पाओगे।
फिर इस जीवन मे नाम कमाकर, तब क़ाबिल कहलाओगे।

अब्बा….

सदा सहारा बना रहा वो,

जीवन की तकलीफों में

कठोर बनकर आगे बढ़ाया,

हम फिसले तो हमे उठाया

कहता उठो और आगे बढ़ो,

मेहनत कर मंजिल पा लो

अपनी कामयाबी को देखा,

सदा बच्चों की सफलताओं में

वो ख़ुदा नही पर पिता ही है,

जो रहता सदा दुआओं में

दौर…

मेरे वतन में आज कल ख़ुत्बो का दौर है।
कोई कहता है हम सही हैं वो ही चोर है,
ज़ौ भी आजकल धुंधला सा क्यू हो गया, चारो और सर्द हवाओं का जो ज़ोर है……