वो गलियां….

इत्तफाकन उन गलियों से जब, हम यार गुज़रने लगते है।

मानो बीते कल के मंजर, आँखों मे झलकने लगते है।

फिर हल्की सी मुस्कान हमारे, चहरे पर आ ही जाती है।

जो बरसो पहले की नादानी, फिर हमको याद कराती है…

मन घुमक्कड़