ख़ुदा…

पूछें कोई कि हैं ख़ुदा तो नज़र आता क्यो नही,
किसी मुफ़्लिश को आकर बचाता क्यों नही??
.
.
.
तो ऐ मेरे दोस्त…ख़ुदा वह एहसास है जो हम
नादानों को इंसान बनाता है,
फिर इन्ही इंसानों से ख़ुदा के काम कराता है।